विज्ञापन

बहुत नादान है दिल

Saroj Yadav

Mere Alfaz
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            बहुत नादान है दिल इसमें अक्ल कुछ भी नही
        
                                                    
                            
मगर तूँ रूठा तो ये जान अपनी दे देगा
बस तेरे कायदे को ये पढ़ के भूल जाता है
नही तो दुनिया के ये सब इम्तहान दे देगा
ये चाहता है की हर पल तेरे करीब रहे
जो बीतना हो हर सुख दुख ये तेरे साथ सहे
न जाने क्यों ये तेरी हद को लांघ जाता है
नही तो ये किसी के घर से कुछ नही लेगा
इसे तो भूख नही कोई जो सताती है
बस एक प्रेम भरा मन ही इसकी थाती है
इसे समझे कोई या इसको ठोकरें दे दे
हरेक दर्द को दौलत बनाके रख लेगा
बहुत नादान है दिल इसमें अक्ल कुछ भी नही
मगर तूँ रूठा तो ये जान अपनी दे देगा.......

सरोज सरु

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
 
8 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Nema Ram

141 कविताएं

View Profile