बहुत नादान है दिल इसमें अक्ल कुछ भी नही
मगर तूँ रूठा तो ये जान अपनी दे देगा
बस तेरे कायदे को ये पढ़ के भूल जाता है
नही तो दुनिया के ये सब इम्तहान दे देगा
ये चाहता है की हर पल तेरे करीब रहे
जो बीतना हो हर सुख दुख ये तेरे साथ सहे
न जाने क्यों ये तेरी हद को लांघ जाता है
नही तो ये किसी के घर से कुछ नही लेगा
इसे तो भूख नही कोई जो सताती है
बस एक प्रेम भरा मन ही इसकी थाती है
इसे समझे कोई या इसको ठोकरें दे दे
हरेक दर्द को दौलत बनाके रख लेगा
बहुत नादान है दिल इसमें अक्ल कुछ भी नही
मगर तूँ रूठा तो ये जान अपनी दे देगा.......
सरोज सरु
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