रिश्तों में ऊष्मा कम सी है अब दिखते वो जज्बात नही
हाँ चमक दमक कुछ ज्यादा है पर पहले वाली बात नही
जब देहरी मैके की लांघी लगता था सब कुछ हार गई
वापस लौटी जब चहक मिली भाभी तब नजर उतार गयी
सखियों सा मेल तो रहा नही अब नेह में है वो बात नहीं
हाँ चमक दमक कुछ ज्यादा है पर पहले वाली बात नही
दुख दर्द सभी का साझा था बंट जाए लगता आधा था
खुशियां गिनती में थोड़ी थीं पर असर तो उनका ज्यादा था
सब अपने मे अब सिमट गए सुख दुख बंटने की बात नही
हाँ चमक दमक कुछ ज्यादा है पर पहले वाली बात नहीं
दुनिया ही अब तो बदल गयी आकाश पहुंच के अंदर है
अब जोड़ रहे हैं दुनिया को अब विश्व ही घर के अंदर है
मन जोड़े जो अमृत धारा अब रही किसी के साथ नही
हाँ चमक दमक कुछ ज्यादा है पर पहले वाली बात नहीं
दुनिया नकली सुख के आगे असली गहने को भूल गयी
इतना रंग चढ़ा लिया खुद पर अपना चेहरा भी भूल गयी
अब खुद से भी अपनी बात कहे अब ऐसे भी हालात नही
हाँ चमक दमक कुछ ज्यादा है पर पहले वाली बात नही
रिश्तों में ऊष्मा कम सी है अब दिखते वो जज्बात नही
हाँ चमक दमक कुछ ज्यादा है पर पहले वाली बात नही
सरोज यादव सरु
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