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बेरोजगारी

sanjeev

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दुनिया के सारे गम
        
                                                    
                            
इसके आगे होते ना कम,
हर रोज उससे हजारों सवाल होते हैं।

करते हैं वह सब का काम
पर उनकी कहीं गिनती नहीं होती,
मन में उनके कई ख्याल होते हैं।

जेब होती है इनकी खाली
सुर्ख होती है होठों की लाली,
पर बाजार इन से ही गुलजार होते हैं।

दुनिया के सारे गम
इसके आगे होते ना कम,
हर रोज उससे हजारों सवाल होते हैं।

किलो भर की डिग्रियां
है आज इनकी जेब में,
पर ₹10 के लिए यें मोहताज़ होते हैं।

हाय रे व्यवस्था तुझे क्या कहूं
पीस रही है तू जवानी,
शायद इसी से हर रोज बवाल होते हैं।

दुनिया के सारे गम
इसके आगे होते ना कम,
हर रोज उससे हजारों सवाल होते हैं।


एक नौकरी की खातिर
करती है जो मेरा इंतजार,
दूसरे की मेहंदी से अब तों उसके हाथ लाल होते हैं।

मां फूंकती चूल्हे,हो चूकि हैं अंधी
अब तों कभी - कभी ही,
थाली में रोटी के संग दाल होते हैं।

दुनिया के सारे गम
इसके आगे होते ना कम,
हर रोज उससे हजारों सवाल होते हैं।

साथ वाले भी अब साथ नहीं देते
जिनको हमने ही ये पाठ सीखाया -
कि हमेशा एक नहीं हालात होते हैं।

जो कंधे पर थे बैठते
वो कंधे मिलाकर हैं चल रहें,
उनके भी डरे हुए सवाल होते हैं।

दुनिया के सारे गम
इसके आगे होते ना कम,
हर रोज उससे हजारों सवाल होते हैं।

दो वक्त की रोटी
न जाने कब होगी नसीब,
हर रोज अब तों इसी सपने के साथ सोते हैं।

बाबू जी के आंखे भी अब पथरा गई हैं
भूल गये हैं वो भी कि -
एक गरीब के अपने कितने जज़्बात होते हैं।

दुनिया के सारे गम
इसके आगे होते ना कम,
हर रोज उससे हजारों सवाल होते हैं।
-डॉ संजीव कुमार
एक वर्ष पहले
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