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फिर अंतर यह क्यों ?

Sanjai kumar

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                            ग्वाला भैया रोज मिलाते,
        
                                                    
                            
नीर क्षीर में क्यों ?
लेते हो जब पूरे दाम,
फिर बेमानी क्यों ?

अलग-अलग डब्बे में लाते,
देते जैसा जो
सबके पैसे एक समान,
फिर यह अंतर क्यों ?

–– संजय कुमार गुप्त ‘अबोध’
3 घंटे पहले
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