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पढ़ना-लिखना नहीं नसीब

Sanjai kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पढ़ना-लिखना नहीं नसीब,
        
                                                    
                            
करना दिन भर काम
मात-पिता का हाथ बंटाना,
फिर भी क्यों बदनाम।
अच्छी संगति रोटी-कपड़ा,
मिला कभी ना हमको
ऐसा क्यों हे भाग्य विधाता!
करें नमन हम तुमको।।
एक घंटा पहले
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