पढ़ना-लिखना नहीं नसीब,
करना दिन भर काम
मात-पिता का हाथ बंटाना,
फिर भी क्यों बदनाम।
अच्छी संगति रोटी-कपड़ा,
मिला कभी ना हमको
ऐसा क्यों हे भाग्य विधाता!
करें नमन हम तुमको।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X