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पाया नहीं कोई

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करते हुए प्रयास उन्हें पाया नहीं कोई
        
                                                    
                            
रस्ते पर रोक भी उन्हें पाया नहीं कोई
उन्हें उन्हीं की बात बता पाया नहीं कोई
काम उनका उनको सिखा पाया नहीं कोई
उनकी समझ को भी समझ पाया नहीं कोई
जाल में फँसने वाला बाहर आया नहीं कोई
उनकी अबूझ फितरत बूझ पाया नहीं कोई
कर देते कैसे हिकमत सूझ पाया नहीं कोई
उनके फिजा की शोहरत देख पाया नहीं कोई
उन्हें मिल ही जाए मुहूरत रोक पाया नहीं कोई
कब रहते हैं गंभीर जान पाया नहीं कोई
कब हँस दें हो अधीर भान पाया नहीं कोई
वो किसका भला चाहें हवा पाया नहीं कोई
जो दर्द उनसे मिलता दवा पाया नहीं कोई
उनका दूजा साया कभी पाया नहीं कोई
उनको तो आज तक हरा पाया नहीं कोई
कुछ किए बिना अनुभव वैसा पाया नहीं कोई
बेराज़ राज़ उनसा बना पाया नहीं कोई
वैसी रचना खुदा फिर से रच पाया नहीं कोई
आज तक कहीं उससे बच पाया नहीं कोई
-संदीप सिंह कुँवर
6 घंटे पहले
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