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हे! प्रिय बालम, नहिं किताब

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            देखन में बहु सुंदर लागे
        
                                                    
                            
छूने में बहु होय नरम
बाहर से ठंडा ही लागे
भीतर से कर देय गरम
जिसको मिले बढ़ा दे आब
हे! प्रिय बालम, नहिं किताब
-कुँवर
3 घंटे पहले
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