देखन में बहु सुंदर लागे
छूने में बहु होय नरम
बाहर से ठंडा ही लागे
भीतर से कर देय गरम
जिसको मिले बढ़ा दे आब
हे! प्रिय बालम, नहिं किताब
-कुँवर
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