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बदनीयत की झुंड हो

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बदनीयत की झुंड हो
        
                                                    
                            
सदनीयत एकाकी
ऐसे में कैसे सज पाएगी
अच्छों की झाँकी
काँव-काँव में दब जाए
कोयल का मधुगान
जलन उन्हीं को आपसे
जिनका रखते ध्यान
-कुँवर
2 घंटे पहले
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