बदनीयत की झुंड हो
सदनीयत एकाकी
ऐसे में कैसे सज पाएगी
अच्छों की झाँकी
काँव-काँव में दब जाए
कोयल का मधुगान
जलन उन्हीं को आपसे
जिनका रखते ध्यान
-कुँवर