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अब इहै उपाई

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक मात्र अब इहै उपाई, अपनी राह चला चल भाई
        
                                                    
                            
जे जेस बुझै करइ ढिटाई, मम निज नैन नहिं घूमाई
रिश्ते में दिए वित्त उधारी, बची न इज्जत गई उभारी
आपन घर आपन न रहही, छोड़ै कोउ न कर गहही
सगा भी न सगा देखावैं, रोका क्यों जो अब तक पावैं
अइसै गा आदर्श विलीना, भए स्वर्ण सिद्धांत मलीना
न रोको सब देते जाओ, रोक कुँवर दुश्मनी निभाओ
-कुँवर
2 घंटे पहले
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विजय कुमार

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