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अब इहै उपाई

                
                                                         
                            एक मात्र अब इहै उपाई, अपनी राह चला चल भाई
                                                                 
                            
जे जेस बुझै करइ ढिटाई, मम निज नैन नहिं घूमाई
रिश्ते में दिए वित्त उधारी, बची न इज्जत गई उभारी
आपन घर आपन न रहही, छोड़ै कोउ न कर गहही
सगा भी न सगा देखावैं, रोका क्यों जो अब तक पावैं
अइसै गा आदर्श विलीना, भए स्वर्ण सिद्धांत मलीना
न रोको सब देते जाओ, रोक कुँवर दुश्मनी निभाओ
-कुँवर
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एक घंटा पहले

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