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क्या क्या नहीं किया।

सुनील देव

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अच्छा आया साल मेरा भी क्या क्या नहीं किया।।
        
                                                    
                            
बस्ती छोड़ी गाँव भी छोड़ा क्या क्या नहीं किया।।
कदम कदम पर आँख मिचौली खेली है क़िस्मत,,
आंखों में रख उसकी सूरत क्या क्या नहीं किया।।
सागर जैसे लोग मिले पर प्यास बुझी ना दिल की,,
ख़्वाब गिरे ना पलकों से बस क्या क्या नहीं किया
वुज़ू किया रोज़ा भी रखा पर आया नहीं तू मिलने,
घर से अपने दूर थी मस्ज़िद क्या क्या नहीं किया।
जब सुनता है सबकी अल्लाह क्यूँ मेरी नहीं सुनी,,
मैने ए दिल तेरी ख़्वाहिश में क्या क्या नहीं किया।
जाते जाते साल भी मेरा बस खेल रहा है मुझसे,,
शुरू से लेकर अब तक मैने क्या क्या नहीं किया।।
मेरी भी कुछ सुन ले मौला साँस बची है कितनी,,
तुझे मनाने में हमनें देव यां क्या क्या नहीं किया।।
-सुनील देव
2 घंटे पहले
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