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गांधी जी का किरदार

Saleem Javed

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बे तेग़-ओ-तुफंग, आतिश-ए-हक़ का वो मकाँ था
        
                                                    
                            
था फ़क़्र-ए-मुजस्सम, पे शहंशाह-ए-ज़माँ था
तोड़ा है ख़ुदी से जो तकब्बुर के सिनाँ को
ख़ामोश सदा से भी जो तूफ़ान-ए-जहाँ था
5 घंटे पहले
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