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मेरे प्यार की कहानी

Sagar Patidar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज दिल हुआ है तनहा
        
                                                    
                            
इस कलम् की जुबानी
ले मैंने लिख दी तेरे नाम
मेरे प्यार की कहानी
तेरी यादो के इर्द गिर्द अक्सर
मैं सिमट सा जाता हूं
जिस पल कभी तेरी याद आ जाए
मैं सिसक सा जाता हूँ
दीदार हुआ था जब तेरा
इश्क़ को मैने जाना था
तेरे चेहरे को भी मैंने
चाँद का टुकड़ा माना था
तुझे छूकर ये हवाएं
जो महक सी जाती थी
मेरे कानो में आकर 
कोई प्रेम राग गा जाती थी
याद तेरी दिलाकर मुझको 
जब कही उड़ जाती थी
मत पूछ की फिर तेरी यादे
मुझे किस कदर तड़पती थी
दर्द हुआ है जब जब तुझको
अंख मेरी भी भर आती थी
तू रोती थी जिस दफा तो
भूक मेरी मिट जाती थी
इंकार किया था इजहार का मेरे
कहा सिर्फ दोस्त बनके रह जाना
जैसे शाम हो कहती अपनी लाली से
महज रंग बनकर अब आ जाना
जैसे वन कहता हो कोयल से की
गीत कभी अब ना गाना
जैसे खुशबू उड़ गयी हो कही
कोई प्यारे वन के फूलों से
जैसे पक्षी छोड़ चले हो कोई
भरा सरोवर बूंदों से
जैसे भावरा भूल गया हो अपनी
मधुर मधुर गुंजन का स्वर
अरे तू क्या जाने कितना गहरा है
मेरा तेरा प्रेम प्रसंग
मै सच्चा प्यार निभाता हूं, सुन
ज़िन्दगी तेरे हिस्से जोड़ दूंगा
जिस दिन रुकी तेरी साँसे तो
जा,मैं अपनी साँसे छोड़ दूंगा

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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