विज्ञापन

खाली थे पेट बस दानो की कमी थी बारिशों की बूंदो के बाण

Sachin Nigam

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पथ की ऊंचाइयों पे चढ़ा ही था
        
                                                    
                            
उलझे से मन में कुछ बुना ही था
घर से जैसे निकला ही था
कदम दो कदम बड़ा ही था

के मौसम ने बदला रंग
हुआ हर तरफ जल तरंग
सभी मंजिल को अपनी अपनी दौड़े
मैं भी दौड़ा उन्हीं के संग

शाखो पे परिंदों का रेला था
नजर उठाया देखा जैसे मेला था
हर परिंदे के पंखों पर नमी थी
खाली थे पेट बस दानो की कमी थी

बारिशों की बूंदो के बाण
छन छन के आने लगे
सुखी बेजान पत्तियो के प्राण
धन धन के गाने लगे

तपती जमी पे
मुस्कुराहट की झलक थी
नया जीवन नई उम्मीद
की अलख थी

मौसम का देखा
ऐसा अनोखा रूप
बादल गरजे बरसे
निकली तेज धूप

प्रकृति का ऐसा व्यवहार
किसके लिए है
ये ना करती फर्क
ये सबके लिए है
-सचिन निगम
9 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Prasoon Saxena

973 कविताएं

View Profile