कृष्ण वासुदेवाय,
कृष्ण जगदीश्वराय,
कृष्ण हरि हरि.....
कृष्ण नारायणाय ।।
कृष्ण प्रिया भी हैं,
कृष्ण हैं प्रियतमा,
कृष्ण गोपी भी हैं.....
कृष्ण हृदयात्मा ।।
कृष्ण हैं लक्ष्मी रूप,
कृष्ण राधा स्वरूप,
कृष्ण ग्वाल सखा.....
कृष्ण बाके बिहारी ।।
कृष्ण भक्ति भी हैं,
कृष्ण निष्ठा भी हैं,
कृष्ण शक्ति भी हैं.....
कृष्ण सृष्टा भी हैं ।।
कृष्ण पूजा भी हैं,
कृष्ण हैं प्रार्थना,
कृष्ण शिक्षा भी हैं.....
कृष्ण हैं साधना ।।
कृष्ण शंकर में हैं,
कृष्ण हैं गौरी मां,
कृष्ण सब में रमाए.....
कृष्ण सब में समाए ।।
मन का दर्पण हैं कृष्ण,
कृष्ण हैं समर्पण.....
तुम पुकारो तो सही,
कृष्ण दौड़े आएंगे ।।
कृष्ण वासुदेवाय,
कृष्ण जिदीश्वराय,
कृष्ण हरि हरि.....
कृष्ण नारायणाय ।।
- रूपल दुबे