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लोगो के हर मन मे,आनन्द और उल्लास भर रहा है।

Ritu Matawale

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वर्षा जल से तृप्त हुवी,सुखी हुवी नदियों की धारा।
        
                                                    
                            
कल-कल कर बहने लगी,नदियों की सूखी जल धारा।
झर-झर बहने लगी,झरनो की सूखी जल धारा।
कितना प्यारा लगता है, ये वर्षा से बहने वाली जल धारा।
तृप्त हुवी धरती के कोने-कोने,ताल सरोवर लगता है प्यारा।
कितना अच्छा लगता है, लहलहाती धान भी प्यारा।
हरियाली से ओत -पोत है, धरती के हर किनारा।
किसानों के मन भी,आनन्द और उल्लास से भरा है।
वर्षा रानी का ,आभार व्यक्त कर रहा है।
मन पुलकित और,आनन्दित हो रहा है।
धरती की हरियाली देख कर,जीवन भी मचल रहा है।
वर्षा रानी का हृदय से,सुक्रियादा कर रहा है।
खेतो और खलियानों में,हरियाली ही हरियाली छा रहा है।
हरियाली देख कर मन,आनन्द से पुलकित हो रहा है।
मानो जीवन आनन्द भरी,संगीत सुना रहा है।
धरती के कोने-कोने, हरियाली से सज रहा है।
नदिया की बहती जलधारा,कल-कल कर रहा है।
वर्षा जल से जैसे,हर जीव तन्तु तृप्त हो रहा है।
सूखे ताल तलैया,वर्षा जल से आनन्दित हो रहा है।
मन के हर कोना-कोना,जैसे पुलकित हो रहा है।
वृक्ष लताये भी,वर्षा रानी का सुक्रियादा कर रहा है।
प्रकृति भी अपने अनुपम दृश्य,को दिखा रहा है।
वर्षा से भीगी प्रकृति,कितना सुंदर प्रतीत हो रहा है।
जीव जंतु हर प्राणी,सुक्रियादा कर रहा है।
जीवन में जैसे,आनन्द भरी संगीत उभर रहा है।
मन की निश्छल भावो से,सुक्रियादा कर रहा है।
वर्षा से भीगी धरती भी,जीवन का कहानी सुना रहा है।
लोगो के हर मन मे,आनन्द और उल्लास भर रहा है।
वर्षा के इस मौसम का,आनन्द उठा रहा है।
वन उपवन जंगल भी,सुक्रियादा कर रहा है।
पेड़ पौधे वृक्ष लताये भी,खुशियो से झूम रही है।
झर-झर करती कल-कल करती नदिया बह रही है।
जैसे सागर को मिलने,ये नदिया तड़फ रही है।
पूर्ण वेगो से बलखाती,ये नदिया बह रही है।
सागर की गोदी में जाने को,ये नदिया तड़फ रही है।
जल से भरा तलब भी,पुलकित हो रही है।
वर्षा रानी का,हृदय से सुक्रियादा कर रही है।
गर्मी से सूखे बांध में भी,वर्षा जल समाहित हो रही है।
वर्षा के जल से,हर जीवित प्राणी तृप्त हो रही है।
गर्मी से सूखे धरती भी, वर्षा जल से तृप्त हो रही है।
नदियों की जल धारा,पूर्ण वेग से बह रही है।
आनन्द विभोर हो कर,ये मन पुलकित हो रही है।
नदियों की जल धारा ,सागर से मिलने को तड़फ रही है।
जड़ चेतन हर प्राणी,वर्षा रानी का सुक्रियादा कर रही है।
झर-झर करती,कल-कल करती ये नदिया बह रही है।
जड़ चेतन हर प्राणी,वर्षा रानी का सीक्रियादा कर रही है।
सूखे ताल तलैया भी,वर्षा जल से भर रही है।
जड़ चेतन हर प्राणी, वर्षा रानी का सुक्रियादा कर रही है।
18 घंटे पहले
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