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घर वालों का प्यार

Rishi Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिम्मेदारियों का बोझ इतना था कि उठ ना सके हम
        
                                                    
                            
मेरा खुदा मेरे आंखों के सामने था पर झुक ना सके हम
मेरी परवरिश में संस्करों का एक ऐसा कतरा शामिल था
कि चाहकर भी घरवालों से कभी रूठ ना सके हम
By Yaduraj Rishi



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6 वर्ष पहले
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