विज्ञापन

दर्द

Rishi Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रात को जब सब सोने जाते हैं
        
                                                    
                            
हम छत पर अकेले रोने जाते हैं
जिस अंधेरों से रूह सहम जाती है
अब उसी अंधेरों के होने जाते हैं
By Yaduraj Rishi


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all