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दर्द

                
                                                         
                            रात को जब सब सोने जाते हैं
                                                                 
                            
हम छत पर अकेले रोने जाते हैं
जिस अंधेरों से रूह सहम जाती है
अब उसी अंधेरों के होने जाते हैं
By Yaduraj Rishi


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6 वर्ष पहले

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