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उसका शहर भीगता रहा

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आसमान बरसता रहा, उसका शहर भीगता रहा,
        
                                                    
                            
मेरा दिल भी जाने क्यों उसकी तरफ़ खिंचता रहा।

बादल वहाँ झुककर उसके शहर को छूते रहे,
मैं यहाँ बैठा हुआ बस बारिशों को सुनता रहा।

कह दिया मौसम ने शायद, आज आ जाओ यहाँ,
मैं भी उसकी गलियों में, भीगने को तरसता रहा।

बारिशें होती रहीं, मिट्टी महकती ही रही,
और मेरा मन उसी के शहर में भटकता रहा।
-रतन कुमार कैथवास
एक घंटा पहले
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