तू आए या न आए इस राह पर कभी,
हमें तो ख़ुद को तेरे नाम करना है।
न ख़बर तेरी, न कोई पैग़ाम आया,
फिर भी दिल ने तेरा इंतज़ार करना है,
लोग कहते हैं छोड़ दे अब ये रास्ता,
दिल कहता है… यहीं पर गुजर बसर करना है।
न मंज़िल का पता, न सफ़र की ख़बर,
फिर भी तेरा नाम लेकर चलना है,
तू मिले तो उलफ़त मुकम्मल होगी,
न मिले तो भी तेरा इंतज़ार करना है।
-रतन कुमार कैथवास