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नमक महज स्वाद नहीं है, रिश्तों का आधार

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नमक बनाने वालों, सुन लो भारत की पुकार,
        
                                                    
                            
नमक का मतलब वफ़ा है, तुम हो देश के वफ़ादार।
जिस मिट्टी का अन्न खाया, उसका रखना मान,
तुम्हारे श्रम की हर कोशिश से, ऊँचा हो हिंदुस्तान।

समंदर की लहरों से लड़कर, धूप में तपते जाते हो,
अपने कठिन श्रम से, नमक तैयार बनाते हो।
तुम्हारे हाथों की मेहनत में, भारत का सम्मान,
तुम्हारे श्रम से रोशन होता, घर-घर का संसार।

नमक महज़ स्वाद नहीं है, रिश्तों का आधार,
नमक-हलाली सिखलाती है, सच्ची वफ़ा और प्यार।
जिस थाली में खाते हैं हम, उसका रखना मान,
वफ़ा निभाना धर्म हमारा, यही देश की शान।

गांधी जी ने नमक उठाकर, जग को राह दिखाई थी,
सत्य-अहिंसा की ताक़त से, सत्ता को चुनौती दी थी।
दांडी की उस यात्रा में, गूँजी थी ललकार,
नमक बना आज़ादी का प्रतीक, जाग उठा संसार।

नमक बनाने वालों, तुम्हें हमारा सलाम,
तुम्हारे श्रम से रोशन होता, भारत का नाम।
ईमानदारी की राह पर, बढ़ते रहना हर बार,
तुम्हारी मेहनत, तुम्हारी वफ़ा, देश का सच्चा शृंगार।

नमक की हर इक डली में, मेहनत की पहचान,
इसकी हर इक बूँद में, बसता भारत का अभिमान।
देश की मिट्टी से वफ़ा हो, दिल में रहे सत्कार,
नमक बनाने वालों, तुम पर गर्व करे संसार।
-रतन कुमार कैथवास
7 घंटे पहले
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