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ख्वाबों में मिलें

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वक़्त की धूल ने चेहरों को धुँधला कर दिया,
        
                                                    
                            
फिर भी कुछ रंग पुराने से जवाबों में मिलें।

तेरी यादों को समेटे हुए बैठा हूँ अभी,
कौन जाने तेरे ख़त आज भी गुलाबों में मिलें।

हमने जिस मोड़ पे छोड़ा था हसरत का सफ़र,
हो सकता है वही रास्ते हिसाबों में मिलें।

तू अगर याद करे स्याह रात के सन्नाटे में,
हम भी शायद किसी टूटे हुए ख़्वाबों में मिलें।

ज़िंदगी ने हमें बिखरा दिया, मौसम की तरह,
फिर भी कुछ हिस्से हमारे, तेरे ख़्वाबों में मिलें।

और जब उम्र की आख़िरी शाम उतरने लगे,
हम तुझे ढूँढते हुए अपने जवाबों में मिलें।
रतन कुमार कैथवास
एक घंटा पहले
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