मेरे दिल की हालत का उन्हें इल्म कहाँ है,
मैं भी मुस्काकर कहूँगा कि कमाल अच्छा है।
ज़ख़्म गहरे हैं मगर चेहरे पे शिकवा भी नहीं,
लोग पूछें तो कहूँगा कि ख़याल अच्छा है।
जिसने समझा ही नहीं मेरी ख़ामोशी का दर्द,
उससे क्या कहिए कि हर चाल में हाल अच्छा है।
तुम अगर पूछो कि उलफ़त का क्या अंजाम हुआ,
हँस के कह दूँगा कि अब भी मेरा हाल अच्छा है।
टूट जाएँ तो बिखरने का हुनर रखते हैं हम,
दुनिया समझेगी कि मौसम का उछाल अच्छा है।
'रतन' अब दर्द को कहना भी गवारा नहीं है,
कोई पूछे तो बस इतना कहना कि मेरा हाल अच्छा है।
-रतन कुमार कैथवास