न तीर चलाओ, न तलवार उठाओ,
हर ज़ुल्म के आगे कोई सवाल उठाओ।
जब सामने ताक़त का पहाड़ खड़ा हो,
तुम सच को लिखो और उजाला उठाओ।
लड़ना हो अगर वक़्त की स्याहियों से,
काग़ज़ पे छुपे हुए सवाल निकालो,
आवाज़ दबाने से सच मरता नहीं है,
ख़ामोश लबों से भी मशाल निकालो।
हथियारों से फ़ैसले देर तक नहीं टिकते,
लफ़्ज़ों में ज़माने का हिसाब रखो,
जब झूठ सजाकर बाज़ार में आए,
तुम उसके मुक़ाबिल एक सच्चा अख़बार रखो।
-रतन कुमार कैथवास