आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

एक सच्चा अखबार रखो

                
                                                         
                            न तीर चलाओ, न तलवार उठाओ,
                                                                 
                            
हर ज़ुल्म के आगे कोई सवाल उठाओ।
जब सामने ताक़त का पहाड़ खड़ा हो,
तुम सच को लिखो और उजाला उठाओ।

लड़ना हो अगर वक़्त की स्याहियों से,
काग़ज़ पे छुपे हुए सवाल निकालो,
आवाज़ दबाने से सच मरता नहीं है,
ख़ामोश लबों से भी मशाल निकालो।

हथियारों से फ़ैसले देर तक नहीं टिकते,
लफ़्ज़ों में ज़माने का हिसाब रखो,
जब झूठ सजाकर बाज़ार में आए,
तुम उसके मुक़ाबिल एक सच्चा अख़बार रखो।
-रतन कुमार कैथवास
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
44 minutes ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर