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फिर वो सुबह भी आयेगी

Ramnath Kesarwani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ वक्त के थपेड़ों से जिन्दगी रुकती नहीं
        
                                                    
                            
पथ अंधेरे हों मगर रोशनी थकती नहीं,
हैं यहाँ चाँद भी, सूरज भी चमक रहा
हो यहाँ जितना तिमिर नभ संग तारे दमक रहा,
इक हवा का रुख यहाँ दिग्भ्रमित सा हो गया
मगर वक्त ये ना समझ ले वो विजित हो गया ।
हवाओं का रुख यहाँ यूँ हमें नहीं तोड़ सकता
वक्त का दरिया भी हमको यूँ नहीं रोक सकता,
दर्द का सागर यहाँ भले ही गहरा हो गया
भले ही कुछ वक्त को मानव गम में खो गया ।
मगर ये इक युद्ध है, जो तिमिर विरुद्ध है
मार्ग हमको खोजना है जो अभी अवरुद्ध है
साथ सबको लायेंगे, मानवता को जगायेंगे
हो अभी भले निराशा, उम्मीद का सूरज लायेंगे,
ना थकेंगे, ना डरेंगे, ना झुकेंगे हम कभी
साथ चलेंगे, साथ लड़ेंगे, साथ जीतेंगे हम सभी,
फिर वो सुबह भी आएगी, रोशनी भी लाएगी,
प्रेम और सौहार्द का राग सुन्दर गाएगी ।

- डॉ. रामनाथ केसरवानी
2 वर्ष पहले
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