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कल का बंदोबस्त

Ramjeet pal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक और चाहता है आदमी कि वह खूब अच्छे से खाए पिए सोए और रहे सदा मस्त,
        
                                                    
                            
बदलते वक्त के साथ अपने परिवार के खुशियों में रहे सदा ही व्यस्त,
और वहीं दूसरी ओर चाहता है जब तक कि उसके कल का ठीक से न हो बंदोबस्त,
तब तक ना ही वह काम करने से थके और ना ही दिन का सूरज हो अस्त|
-मनस्व
एक दिन पहले
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