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कल का बंदोबस्त

                
                                                         
                            एक और चाहता है आदमी कि वह खूब अच्छे से खाए पिए सोए और रहे सदा मस्त,
                                                                 
                            
बदलते वक्त के साथ अपने परिवार के खुशियों में रहे सदा ही व्यस्त,
और वहीं दूसरी ओर चाहता है जब तक कि उसके कल का ठीक से न हो बंदोबस्त,
तब तक ना ही वह काम करने से थके और ना ही दिन का सूरज हो अस्त|
-मनस्व
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10 घंटे पहले

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