विज्ञापन

भाजपा की हारी हुई अयोध्या लगती है

Rakshit Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या बताऊँ तुम्हें वो मेरी क्या लगती है
        
                                                    
                            
भाजपा की हारी हुई अयोध्या लगती है

मैं ज़िन्दगी का कोई सामान्य लमहा हूँ
मगर वो कोई हसीन हादिसा लगती है

मैं भूख से बिलखते किसी बच्चे जैसा
वो भुखमरी पे लिखी कविता लगती है

मेरी हालत बिहार के विकास जैसी है
वो बनारस की मणिकर्णिका लगती है

जब कहती है मैं उसको पसन्द नहीं हूँ
चन्दर को ठुकराती हुई सुधा लगती है

मोहब्बत ने दिल को पत्थर कर दिया
पत्थर हुए दिल को चोट कहाँ लगती है
~ रक्षित मिश्रा
5 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all