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भाजपा की हारी हुई अयोध्या लगती है

                
                                                         
                            क्या बताऊँ तुम्हें वो मेरी क्या लगती है
                                                                 
                            
भाजपा की हारी हुई अयोध्या लगती है

मैं ज़िन्दगी का कोई सामान्य लमहा हूँ
मगर वो कोई हसीन हादिसा लगती है

मैं भूख से बिलखते किसी बच्चे जैसा
वो भुखमरी पे लिखी कविता लगती है

मेरी हालत बिहार के विकास जैसी है
वो बनारस की मणिकर्णिका लगती है

जब कहती है मैं उसको पसन्द नहीं हूँ
चन्दर को ठुकराती हुई सुधा लगती है

मोहब्बत ने दिल को पत्थर कर दिया
पत्थर हुए दिल को चोट कहाँ लगती है
~ रक्षित मिश्रा
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4 घंटे पहले

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