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तुम्हारे बिना

Rakesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आँखों में तुम बस गए हो पिया।
        
                                                    
                            
तुम्हारे बिना अब ना लगे जिया।

मैं ऐसी कली जो खिली ही नहीं,
चाहत से अपनी खिलाना पिया।

चाँद तारे गगन में निकल आए हैं,
अब तुम भी मेरे पास आना पिया।

दूरियाँ हमको इतना सताने लगी,
मेरे जख्मों पर मरहम लगाना पिया।

अब मचलने लगा दिल तुम्हारे बिना,
आके बाँहों में हमको समाना पिया।

रातरानी महकने लगी है सनम,
गर्म साँसों से हमको लुभाना पिया।

बादलों की गरज में है आतुर जिया,
आके सीने से हमको लगाना पिया।

© राकेश कुमार सिंह
2 वर्ष पहले
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