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पानी की बूंद

Rajiv Tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़िन्दगी है चीज़ क्या,
        
                                                    
                            
पानी की ढ़लकती एक बूंद है,
गिरे ऊंचे आसमानों से गर
तो करती ऊंची गूंज है,
क़ीमती बड़ी है यह चीज़ पर,
सहेज कर रखना चाहिये,
सलीक़े से घुटती ज़िंदगी में
ज़िंदगी हर घूंट है.

 
एक घंटा पहले
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