ज़िन्दगी है चीज़ क्या,
पानी की ढ़लकती एक बूंद है,
गिरे ऊंचे आसमानों से गर
तो करती ऊंची गूंज है,
क़ीमती बड़ी है यह चीज़ पर,
सहेज कर रखना चाहिये,
सलीक़े से घुटती ज़िंदगी में
ज़िंदगी हर घूंट है.
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