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ये दिल क्यों आज उलझ गया ?

Rajesh Kumar Sen Raj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये दिल क्यों आज उलझ गया?
        
                                                    
                            
सब अपने फिर क्यों अपनों से बिछड़ सा रहा
कभी लगता कि जिम्मेदारी
या कभी लगता कि परेशानी
से दिल ये आज उलझ गया।

मन आज खिन्न खिन्न हो सा गया
जैसे सब कुछ भी है फिर भी सब कुछ छिन सा गया
पैसा रुपया भी इसका कारण बन सा गया
बड़ा भी होना एक घूरा सा हो गया
कह न सका अपने दर्द की सिसकियों सा भरा
शायद दिल यूं उलझ सा रहा।
2 दिन पहले
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