ये दिल क्यों आज उलझ गया?
सब अपने फिर क्यों अपनों से बिछड़ सा रहा
कभी लगता कि जिम्मेदारी
या कभी लगता कि परेशानी
से दिल ये आज उलझ गया।
मन आज खिन्न खिन्न हो सा गया
जैसे सब कुछ भी है फिर भी सब कुछ छिन सा गया
पैसा रुपया भी इसका कारण बन सा गया
बड़ा भी होना एक घूरा सा हो गया
कह न सका अपने दर्द की सिसकियों सा भरा
शायद दिल यूं उलझ सा रहा।