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नारी शक्ति है

rajesh katre

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                            हो जन्म धरती पर बेटी का,
        
                                                    
                            
उसका बचपन सबको खूब सुहाय,
असाधारण साक्षात लक्ष्मी की वो संज्ञा पाय,
है विविध रुप धारिणी, तू भुवन में पूजी जाय।

उम्र बढ़े, तुझ पर रहें पलकों के साये,
अपने भाई में भी पहरेदार के तू दर्शन पाय,
क्यों मौज नहीं, तालीम रोक-टोक की खाय,
है विविध रुप धारिणी, फिर भी तू बनती पन्ना धाय।

न आकाश अछूता, दुर्लभ को कल्पना ने की साकार,
पाशविकता में भले दहन और होते हों अब अत्याचार,
माँ भारती की आरती साहा ने की जल सीमा पार,
है विविध रुप धारिणी, जग प्रकट करता तेरा आभार।

नारी ही शक्ति स्वरूपा, नारी ही काली बन जाय,
हठ स्वर्ण मृग की चाहे, रावण के चंगुल में फंसा जाय,
किंतु होकर खुद कलंकित, जग को वो पार लगाय,
है विविध रुप धारिणी, तू माता सीता कहलाय।

इतिहास कहे, नारी से युद्ध और हुई क्षति अंबार,
पर नारी ने भी कूद समर में, लाई है हरदम बहार,
रानी अवंती, दुर्गावती, पद्मावती और अनाम हजार,
है विविध रुप धारिणी, नारी तू साक्षात शक्ति अवतार।

☆राजेश कटरे

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