आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

महादेवी वर्मा: झूम-झुक-झुक कह रहा 'हर श्वास तेरा'!

mahadevi verma famous hindi kavita sajal hai kitna savera
                
                                                         
                            

सजल है कितना सवेरा!

गहन तम में जो कथा इसकी न भूला,
अश्रु उस नभ के, चढ़ा शिर फूल फूला,
झूम-झुक-झुक कह रहा 'हर श्वास तेरा'!

राख से अंगार-तारे झर चले हैं,
धूम-बंदी रंग के निर्झर खुले हैं,
खोलता है पंख रूपों में अँधेरा!

कल्पना निज देखकर साकार होते
और उसमें प्राण का संचार होते,
सो गया रख तूलिका दीपक-चितेरा!

अलम पलकों से पता अपना मिटाकर,
मृदुल तिनकों में व्यथा अपनी छिपाकर,
नयन छोड़े स्वप्न ने, खग ने बसेरा!

ले उषा ने किरण-अक्षत हास-रोली,
रात अंकों से पराजय-रेख धो ली,
राग ने फिर साँस का संसार घेरा!

5 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर