रवैये से बनता है बसेरा
कौन फिर मुड़कर आएगा
तेरे घर की तरफ,
रवैया ठीक न हो तो
परिंदे भी बसेरा नहीं करते।
घर सिर्फ दीवारों से नहीं,
अपनापन और सम्मान से बनता है,
जहाँ बात-बात पर दिल दुखे,
वहाँ कोई ठहरना नहीं चाहता है।
रिश्ते भी परिंदों जैसे होते हैं,
प्यार मिले तो लौट आते हैं,
और बेरुखी मिले बार-बार,
तो दूर आसमान में उड़ जाते हैं।
इसलिए घर को घर बनाए रखना,
रिश्तों को बोझ नहीं, अपनापन देना,
क्योंकि एक बार जो उड़ जाए कोई,
हर बार लौटकर नहीं आता।
-रजनी