प्रेम के बिना भी
कभी दो लोग प्रेम में हुए बिना भी,
पूरी वफ़ादारी से रिश्ता निभा सकते हैं,
क्योंकि हर रिश्ता
मोहब्बत का मोहताज नहीं होता।
कभी साथ में धड़कनें नहीं होतीं,
फिर भी एक-दूसरे की फ़िक्र होती है,
कभी प्रेम की बातें नहीं होतीं,
फिर भी रिश्ते की कद्र होती है।
जहाँ आकर्षण नहीं,
वहाँ भी सम्मान हो सकता है,
जहाँ चाहत नहीं,
वहाँ भी समर्पण हो सकता है।
कभी दो लोग
एक-दूसरे के प्रेमी नहीं होते,
फिर भी एक-दूसरे के
सबसे सच्चे साथी होते हैं।
क्योंकि रिश्ता सिर्फ़ प्रेम से नहीं,
विश्वास, जिम्मेदारी और वफ़ादारी से भी बनता है—
और कभी-कभी
प्रेम से दूर रहकर भी
दो लोग पूरी उम्र
एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं।
— रजनी