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ज़िंदगी जैसी बाहर से दिखती है

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरी हँसी का राज़
        
                                                    
                            

कुछ बेवकूफ़ लोग
मुझे हँसता हुआ देखकर
मुझ जैसी ज़िंदगी चाहते हैं,
उन्हें क्या पता—
इस मुस्कान तक पहुँचने में
मैंने कितने आँसू बहाए हैं।

जो आज मेरी हँसी देखते हैं,
उन्होंने मेरे कल नहीं देखे,
मेरी खामोश रातें नहीं देखीं,
मेरे भीतर के टूटने को नहीं देखा।

ज़िंदगी जैसी बाहर से दिखती है,
वैसी होती नहीं,
हर मुस्कुराता चेहरा
खुश होता नहीं।
-रजनी
2 घंटे पहले
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