विज्ञापन

दर्द से निकली संवेदना

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दर्द से निकली संवेदना
        
                                                    
                            

जो खुद गिरकर संभले हैं,
वो किसी को धक्का नहीं देते,
जिन्होंने दर्द को करीब से देखा है,
वो किसी को दर्द देना नहीं सीखते।

जिन्होंने टूटना सहा है,
वो किसी को तोड़ना नहीं जानते,
क्योंकि जो खुद अँधेरे से निकलकर आया हो,
वो किसी और को अँधेरे में धकेल नहीं सकता।

जिसने सच में दुःख जिया है,
वो दूसरों के आँसू पहचान लेता है,
वो किसी के घाव पर नमक नहीं छिड़कता,
बल्कि चुपचाप मरहम बन जाता है।

दर्द इंसान को कठोर नहीं बनाता,
अगर दिल में इंसानियत बची हो,
तो वही दर्द उसे और संवेदनशील बनाता है—
दूसरों के दर्द को समझने के लिए,
दूसरों को संभालने के लिए।

शायद इसीलिए
कुछ लोग बहुत कुछ सहकर भी
किसी को कुछ नहीं कहते,
क्योंकि वे जानते हैं—
दर्द देना आसान है,
दर्द समझना इंसान होने की निशानी है।
— रजनी
एक दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all