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एक इंसान

RAJ KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक इंसान
        
                                                    
                            
टूटता है
बिखरता है
प्रसन्न होता है
और
ढल जाता है
आवश्यकता
की
आँधियों
के अनुरूप।
एक घंटा पहले
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विजय कुमार

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