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भरा पन्ना

Rahul Shrivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सपना
        
                                                    
                            
एक तरफ़...

हल्ला
एक तरफ़...

भगवान सुनो,
मन कर दो नरम 

ना चिंता...
ना निंदा...

किसी से ना हो फरक!

असीम रखूं
बस अंदर सबर...

मुलायम हो जाएगी
वो पैनी नज़र...

अब बात मानने से, क़लह मिटती हो...
तो वही सही 

राहत मांगने पे, मुझे मिल गई फ़ौरन...

और कुछ?

नहीं, नहीं...

-राहुल



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