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भरा पन्ना

                
                                                         
                            सपना
                                                                 
                            
एक तरफ़...

हल्ला
एक तरफ़...

भगवान सुनो,
मन कर दो नरम 

ना चिंता...
ना निंदा...

किसी से ना हो फरक!

असीम रखूं
बस अंदर सबर...

मुलायम हो जाएगी
वो पैनी नज़र...

अब बात मानने से, क़लह मिटती हो...
तो वही सही 

राहत मांगने पे, मुझे मिल गई फ़ौरन...

और कुछ?

नहीं, नहीं...

-राहुल



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47 मिनट पहले

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