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एक प्रेम - गीत : तेरी यादों में हे प्रियतम , द्रग मेरे बहते रहे

pushpendra yadav

Mere Alfaz
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                            तेरी यादों में हे प्रियतम , द्रग मेरे बहते रहे! आओगे कब पास मेरे ,लफ्ज ये कहते रहे!!
        
                                                    
                            
जबसे पाई है जुदाई ,चैन ना पल भर मिला.
कुम्हलाकर जीवन कमल फिर ,पानी में भी ना खिला .

वज्र का हृदय बनाकर , कैसे हम रहते रहे!
आओगे कब पास मेरे , लफ्ज ये कहते रहे !!

सूरज है उगता मगर , मेरी जिंदगी अंधियारे में .
गम मिला तन जा रहा ,जीवन मृत्यु के किनारे में .

इतने दिन से प्राण प्रियतम , गम तेरा सहते रहे !
आओगे कब पास मेरे लफ्ज ये कहते रहे!!


लेखक कवि पुष्पेंद्र सिंह यादव
WhatsApp नंबर -
9568 140 701
दिबियापुर औरैया

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