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डाॅ. पुरुषोत्तम श्रीवास्तव 'पुरु' के सामाजिक दोहे

Purshottam Shrivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नहीं किसी पुरु एक के , भूमि नीर आकाश।
        
                                                    
                            
हर युग में कोशिश हुई,  अंत सभी का  नाश।।
-. पुरुषोत्तम श्रीवास्तव 'पुरु'
10 घंटे पहले
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