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डाॅ. पुरुषोत्तम श्रीवास्तव 'पुरु' के दर्शन पर दोहे

Purshottam Shrivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं - तू बन कर खेलना, जन्मों से शतरंज।
        
                                                    
                            
कोई और  यहाँ नहीं, भ्रामक सुख या रंज।।
- पुरुषोत्तम श्रीवास्तव 'पुरु'
4 दिन पहले
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